Mobile Photography by Sarver

Some of Random Mobile Photography Clicks by me 😊

1. Smile is in your hand 😊

2. Natural Smile 😊

3. Natural Smile😊

4. Smile as Big as you Can 😊

5. Feel the nature😊

6. Natural feeling of Happiness😊

7. Surround yourself geen it makes you happy 😊

8. Find You 😊

9. Im everywhere 😊

10. Find Me 😊

Clicked and Edited by : Sarver

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स्कूलों में बड़ रही नंबरों की कीमत।


स्कूलों में बड़ रही नंबरों की कीमत।

आज स्कूल में पेरेंट्स मीटिंग होने वाली थी और बच्चों की सांसें थमी सी थी कि क्या परफॉरमेंस आएगी उनकी उनके पेरेंट्स के सामने। दरअसल परफॉरमेंस से ज़्यादा बच्चों को ये बात परेशान कर रही थी कि उनके पेरेंट्स का क्या रिएक्शन रहेगा उनके दिए गए एग्जाम का।

अगर उनके मार्क्स अच्छे यानी ज़्यादा आते हैं तो बढ़िया परफॉर्मेंस और अगर कम आते है तो परफॉर्मेंस खराब। कुछ नहीं पड़ते लिखते। दूसरों से comparision देखो उसके कितने बढ़िया मार्क्स आये वो भी तो तुम्हारी ही क्लास का है। कुछ सीखो उससे। ये बरबस सोच रहे थे बच्चे और साथ ही उनके स्कूल टीचर्स भी।

आजकल स्कूल और पढ़ाई का नाता बस नंबरों तक ही सीमित रह गया है। अगर आपको किसी की योग्यता का पैमाना जांचना हो तो वो पहले आपके marks पूछेगा की कितने तुम्हारे कितने marks आये और अगर आपने ज़्यादा नंबर बताये तो आपको योग्य समझा जाएगा और कम नंबर बताने पर कम योग्य।

किसी स्कूल की पेरेंट्स टीचर्स मीटिंग्स को अगर आप ध्यान से देखेंगे तो पेरेंट्स का ज़्यादातर ध्यान इस बात पर रहता है कि उनके बच्चे के किस सब्जेक्ट्स मैं कितने मार्क्स आये और अगर मार्क्स कम आये तो ये क्यों कम आये।

कम मार्क्स आना तो जैसे एक जुल्म हो गया बच्चे और टीचर्स के सामने पेरेंट्स ऐसी नज़रों से देखने लगते है कि इसका जवाब दो, क्यों हमारे बच्चे के कम मार्क्स आये हैं।

कोई 2-4 पेरेंट्स ही ऐसे होते है जो अपने बच्चे के मार्क्स की परवाह नही करके उसके परफॉरमेंस को देखते है कि उसने कितना इम्प्रूव किया खुद मैं बिना किसी दूसरे बच्चे से compare करे।

लेकिन ज़्यादातर का तो बस एक ही हाल रहता है। की बस मार्क्स देखे नही बच्चे के ओर मुंह बनाने लगे। और सुनाने लग गए कभी अपने बच्चे को, कभी टीचर्स को, तो कभी स्कूल को कि यहाँ तो कुछ पढ़ाई होती नही टीचर्स सही से नही पड़ते ओर हमारे बच्चे के मार्क्स कम आते है।

अगर देखा जाए तो इन सबके पीछे ये सिस्टम ही खराब है जो कि हमको बस वही दिखाने की कोशिश करता है जो दूसरे देखना चाहते है। हमारी दुसरो को दिखवा करने की आदत। अगर मार्क्स ज़्यादा आएंगे तो पेरेंट्स को अच्छा लगेगा दूसरे को बताने में कई इसके देखो कितने अच्छे मार्क्स आये है।

ज़्यादा मार्क्स मतलब अच्छी परफॉरमेंस, और कम मार्क्स खराब परफॉर्मेंस का synonyms बन गया है।

ये कागज़ पर लिखे कुछ नंबर तुम्हारा भाग्य नहीं लिख सकते, जीवन मे तो बस काम आएगी तो तुम्हारी योग्यता।

ये कागज़ के रिपोर्ट कार्ड बस रखे ही रह जाएंगे कोई पूछेगा तो बस तुम्हारे अंदर छुपा हुआ टेलेंट।

माना कि ये बात सभी को मालूम है कि नंबरों से ज़्यादा हमारे टेलेंट की कद्र होती है तो फिर स्कूलों में बच्चों के मार्क्स को ज़्यादा तवज्जो दी जाती है।

वो चाहें पेरेंट्स हो, स्कूल की प्रिंसिपल हो, टीचर्स हो, सब यही चाहते है कि सब स्टूडेंट्स के ज़्यादा से ज़्यादा मार्क्स आये सभी सब्जेक्ट में। तभी सही परफॉर्मेस को नापा जा सकता है। जिसके मार्क्स कम आये उसकी परफॉर्मेंस कम।

ये लोग ये क्यों नहीं सोचते कि हर एक की अलग अलग योग्यता होती है और सब को एक ही criteria में नहीं नापा जा सकता। किसी का इंटरेस्ट सब्जेक्टिव मैं है किसी का नहीं। हो सकता है वो अपनी लाइफ में सब्जेक्टिव परफॉमर से ज़्यादा आगे निकल जाए।

और अगर हम लाइफ की बात करें तो सक्सेसफुल लोग स्कूल लाइफ में ज़्यादा मार्क्स लाने वाले नहीं थे। ये बस बात हमको हर पेरेंट्स, प्रिंसिपल, टीचर्स तक पहचानी है ताकि वो स्टूडेंट्स को समझ सके और उनके ऊपर बिना वजह मार्क्स ज़्यादा लेन का प्रेशर न बनाये।

काश ये बात सब समझ सके।

|सरवर|

शमा जब डगमगाने लगी : अल्फ़ाज़ ए सरवर #2

शमा जब डगमगाने लगी कुछ हवाओं के झोंकों से..

किसी ने आकर हाथ क्यों न लगा लिया बुझने से पहले।

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Shama jab dagmagane lagi kuch hawaon k jhonko se….

Kisi ne aakar hath kyo n laga liya
bujhne se pehle.

|Sarver|😊

मनचाही चीजों पर ध्यान : Quotes

मनचाही चीज़ों पर ध्यान दें…

मनचाही चीजों पर ध्यान देने से अनचाही चीज़ें गायब होने

लगती हैं और मनचाही चीज़ें बढ़ने लगती हैं।

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Manchahi cheezon par dhyan dein..

Manchahi cheezon par dhyan dene se

Anchahi cheezein gayab hone lagti hai or

Manchahi cheezein badne lagti hai.

|Sarver|😊

किसकी उम्मीद में…

यूँ बिखरा पड़ा है सामान तेरी वीरानियों का,

कुछ मेरे ज़माने में… कुछ तेरे ज़माने में।

अब न पूछ तू मुझसे कहाँ जाऊं

या घुस जाऊं में तेरे कबूतर खाने में…

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न लगाना उम्मीदों के समंदर का हिसाब

न आएगा कुछ भी…

न तेरे ठिकाने में… न मेरे ठिकाने में

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ये जो रोज़ लगाता है चिड़ियों के संग पेच तू

न सोच तू…

न कटकर आएगा कुछ भी

न कुछ तेरे ज़माने में… न कुछ मेरे ज़माने में।

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©★सरवर★

#MohammadSarver

तेरी वीरानियों में…

तेरी वीरानियों में…

तेरी वीरनियो में आ जाऊ तो कहाँ जाऊ

रुक जाऊं… संभल जाऊं… ठहर जाऊं..

बता किधर जाऊं

उढ़ा के राख़ अरमानों की

में अपने शब्ज़ ख्वाबों में सो जाऊं

तेरी वीरानियों के साये से

अब बचके कहाँ जाऊं

~Sarver~ 😊

तू सूरज था.. तू सूरज है..तू सूरज ही रहेगा तू

आज कुछ अपने टीचर्स के लिए….

तू सूरज था तू सूरज है तू सूरज है रहेगा तू ।

तू सूरज था तू सूरज है तू सूरज है रहेगा तू ।

भले ही छुपजा तू चंद पलो के लिए अँधेरे बादलों में ही सही ।

पर ये वादा है तेरा तुझसे तेरा सबसे..

की जबभी निकलेगा तू आफ़ताब में रौशनी ही तू लाएगा ।

क्योंकि…

तू सूरज था तू सूरज है तू सूरज है रहेगा तू ।

तू सूरज था तू सूरज है तू सूरज है रहेगा तू ।

~Sarver~

Image Credit : Pexel

लिखता गया…

मैं लिख पाता क्या लिखूँ

मुझे ये पता ही नहीं चला की में क्या लिखना चाहता था और क्या लिखने लग गया। बस मेरी उंगलिया यूँ ही लिखती गई और अल्फ़ाज़ बनते गए।

कुछ सोचा नही कुछ समझा नहीं बस लिखता गया लिखता गया।

कुछ रुक कर सोचा तो सोच भी न पाया की क्या लिखूँ बस लिखता गया लिखता गया।

अल्फ़ाज़ों की रूह को टटोलता फिरता रहा, में यूँ दर बदर फिरता रहा की कुछ मिल जाये तो जोड़ लूँ में अपने अल्फाज़ो के साये में

पर मिल न सका कुछ और लिखता गया लिखता गया।

ख्वाब कोई खो सा गया, राह में कुछ सो सा गया, रह गया कोई हमदम।

बस लिखता गया लिखता गया

~सरवर~ ☺

Image Credit : Pexels